refraining from sex

सेक्स से परहेज करना – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Refraining from sex – brahmacharya vigyan

 

कुछ लोग इस गलत धारणा में रहते हैं कि सेक्स से परहेज करना स्वास्थ्य व खुशी के लिए अच्छा है। वे अपनी तथाकथित ऊर्जा को सेक्स संबंधों से परहेज रखकर सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि सेक्स से दूर रहकर जिंदगी लंबी होती है, बदन हृष्टपुष्ट होता है और मानसिक और आध्यात्मिक विकास होता है। यह हकीकत नहीं है। वीर्य एक रस है जो 24 घंटे बनता रहता है। अगर कोई उसे रोकना चाहे, तो भी नहीं रोक सकता। वीर्य को अनिश्चित समय के लिए रोककर रखना मुमकिन नहीं है, चाहे कोई कितना भी संयम करे या योगी और संन्यासी हो। जिस तरह से अनिश्चित काल के लिए मलमूत्र को रोकना नामुमकिन है, उसी तरह वीर्य को भी रोककर रखना असंभव है।

► वीर्य बनने की यह प्रक्रिया
वीर्य बनने की यह प्रक्रिया दिन-रात चलती रहती है। मिसाल के तौर पर पानी से भरे गिलास में अगर और पानी भरने की कोशिश करेंगे तो वह छलक जाएगा। उसी तरह अगर कोई आदमी मैथुन या हस्तमैथुन नहीं करता तो उसका वीर्य स्वप्न मैथुन या निद्रा मैथुन के जरिए बाहर आ ही जाएगा। यह भी गलतफहमी है कि सौ बूंद खून से एक बूंद वीर्य बनता है और एक बूंद खून बनाने के लिए उससे कई गुना पौष्टिक आहार लेने की जरूरत पड़ती है। हकीकत में तो आहार और वीर्य का कोई संबंध ही नहीं है। यह सोच कि अगर हम वीर्य नष्ट नहीं करेंगे तो ज्यादा स्वस्थ रहेंगे और लंबा जीवन जिएंगे, सही नहीं है। इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि ज्यादातर ब्रह्मचारी या अविवाहित लोगों का इंतकाल जल्दी हुआ है। इनमें बड़े-बड़े लोगों के नाम भी शामिल हैं।

संपूर्ण चाणक्य निति
संपूर्ण चाणक्य निति
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