पितृ दोष निवारण मंत्र

रावण संहिता के अनुसार पितृ दोष के उपाय

रावण संहिता के अनुसार पितृ दोष के उपाय

रावण संहिता के अनुसार पितृ दोष के उपाय : जिन लोगों को पितृ दोष है, उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यहां हम कुछ लक्षण दे रहे हैं जो कुंडली में पितृ दोष का संकेत देते हैं। Lal Kitab in Hindi यदि कुंडली के पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें और दसवें घरों […]

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pitr dosh se mukti ke aasaan upay

पितृ दोष से मुक्ति के आसान उपाय – इन्द्रजाल द्वारा पति-पत्नी के बीच अनबन को दूर करने के मंत्र – pitr dosh se mukti ke aasaan upay – indrajaal dwara pati-patni mantr

ज्योतिष शास्त्र में कई प्रकार के दोषों के बारे में बताया गया है। इनमें पितृदोष भी एक है। पूर्वजों के कार्यों के फलस्वरूप आने वाली पीढ़ी पर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव को पितृ दोष कहते हैं। इस दोष को दूर करने के लिए किसी भी अमावस्या, पूर्णिमा या पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने से

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vrishchik rashi- (to

वृश्चिक राशि- (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) – चौदहवां दिन – Day 14 – 21 Din me kundli padhna sikhe – vrishchik rashi- (to, na, nee, nu, ne, no, ya, yee, yoo) – Chaudahavaan Din

पारिवारिक कार्यों का दायित्व बढ़ेगा। भूमि एवं भवन संबंधी विवाद से सावधान रहें। आर्थिक दृष्टि से माह ठीक रहेगा। रचनात्मक गतिशीलता बढ़ेगी। रिश्तेदारों से सहयोग प्राप्त होगा। राजकीय कार्यों में सफलता के शुभ योग तथा विजय का योग बनता है। 22, 24 अशुभ कारक हैं। इन तिथियों में गाय को चारा खिलाने से ग्रह की

वृश्चिक राशि- (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) – चौदहवां दिन – Day 14 – 21 Din me kundli padhna sikhe – vrishchik rashi- (to, na, nee, nu, ne, no, ya, yee, yoo) – Chaudahavaan Din Read More »

mesh rashi- (che

मेष राशि- (चू, चे, लो, ला, ली, लू, ले, अ) – चौदहवां दिन – Day 14 – 21 Din me kundli padhna sikhe – mesh rashi- (che, che, lo, la, lee, loo, le, a) – Chaudahavaan Din

इस राशि वालों को देवगुरु बृहस्पति धार्मिक कार्यों में लगाए रखेंगे लेकिन शरीर में थकावट तथा उदासीनता का योग बना रहेगा। कमजोरी के कारण रूग्णता बढ़ेगी। स्वास्थ्य सुधार हेतु शिव पूजा करें। पत्नी की सेवा से शुभ लाभ बनेगा, लेकिन शारीरिक रूप से दूरी बनाए रखें। आर्थिक दृष्टि से माह चिन्तादायक रहेगा। मान-सम्मान में भी

मेष राशि- (चू, चे, लो, ला, ली, लू, ले, अ) – चौदहवां दिन – Day 14 – 21 Din me kundli padhna sikhe – mesh rashi- (che, che, lo, la, lee, loo, le, a) – Chaudahavaan Din Read More »

sooryakrt pitrdosh ke upaay

सूर्य कृत पितृ दोष के उपाय – पितृ दोष निवारण उपाय – sooryakrt pitrdosh ke upaay – pitra dosh nivaran upay

1. शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार के दिन घर में विध विधान से सूर्ययंत्र स्थापित करें। सूर्य को नित्य तांबे के पात्र में जल लेकर अघ्र्य दें। जल में कोई लाल पुष्प चावल व रोली अवश्य मिश्रित कर लें। जब घर से बाहर जाएं तो यंत्र दर्शन जरूर करें। 2. निम्न मंत्र का एक माला नित्य

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pitr dosh ke shaanti ke upaay

पितृ दोष के शांति के उपाय – पितृ दोष निवारण उपाय – pitr dosh ke shaanti ke upaay – pitra dosh nivaran upay

1. कुंडली में पितृ दोष बन रहा हो तब जातक को घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने स्वर्गीय परिजनों का फोटो लगाकर उस पर हार चढ़ाकर रोजाना उनकी पूजा स्तुति करना चाहिए। उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। 2. अपने स्वर्गीय परिजनों की निर्वाण तिथि पर जरूरतमंदों अथवा गुणी

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kaun banata hai bhoot

कौन बनता है भूत, कैसे रहें भूतों से सुरक्षित – किया कराया, जादू टोना – kaun banata hai bhoot, kaise rahen bhooton se surakshit – jadu tona kiya karaya ke upay

जिसका कोई वर्तमान न हो, केवल अतीत ही हो वही भूत कहलाता है। अतीत में अटका आत्मा भूत बन जाता है। जीवन न अतीत है और न भविष्य वह सदा वर्तमान है। जो वर्तमान में रहता है वह मुक्ति की ओर कदम बढ़ाता है। आत्मा के तीन स्वरुप माने गए हैं- जीवात्मा, प्रेतात्मा और सूक्ष्मात्मा।

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pitra tarpan is done on the same date

पितृ तर्पण उसी तिथि को किया जाता है – पितृदोष | Pitra tarpan is done on the same date – pitrdosh

  पितृ तर्पण उसी तिथि को किया जाता है जिस तिथि को पूर्वजों का देहान्त हुआ हो जिन्हें पूर्वजों की मृत्यु की तिथि याद ना हो वह अश्विन कृष्ण अमावस्या यानि सर्वपितृमोक्ष अमावस्या को यह कार्य करते है ताकि पित्तरों को मोक्ष मार्ग दिखाया जा सके। पितृ पक्ष की नौवी तिथि जिसे मातृ नवमी भी

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fathers farewell at the end of the paternal side

पितृ पक्ष की समाप्ति पर पितरों की विदाई – पितृदोष | Fathers farewell at the end of the paternal side – pitrdosh

  पितृ पक्ष में श्राद्ध करके पितृ अमावस्या के बाद सूर्यास्त के समय पितरों की पूर्ण आदर और श्रद्धा से विदाई अवश्य ही की जानी चाहिए । इसमें शास्त्रीय विधानानुसार सूर्यास्त के समय गंगा / नदी के तटों पर चौदह दीप प्रज्वलित कर पितरों का सिमरन करना चाहिए। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह

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at the time of shraddh of ancestors in shraddha paksha

श्राद्ध पक्ष में पितरों के श्राद्ध के समय – पितृदोष | At the time of shraddh of ancestors in Shraddha Paksha – pitrdosh

  श्राद्ध पक्ष में पितरों के श्राद्ध के समय शास्त्रानुसार कुछ विशेष वस्तुओं और सामग्री का उपयोग उचित और कुछ को निषेध बताया गया है। 1- श्राद्ध में सात पदार्थ बहुत ही महत्वपूर्ण बताए गए हैं जैसे – गंगाजल, दूध, शहद, तरस का कपड़ा, दौहित्र, कुश और तिल। 2- शास्त्रों के अनुसार, तुलसी से पितृगण

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