kaise ho ghar ki boundary wall?

कैसी हो घर की बाउण्ड्री वॉल? – वास्तु और कक्ष दशा – kaise ho ghar ki boundary wall? – vastu aur kaksha dasham

घर चाहे छोटा हो या बड़ा, गांव में हो या शहर में बाउण्ड्री वॉल यानि चारदीवारी अवश्य बनाई जाती है।

घर की बाउण्ड्री वॉल बनवाते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-

1- बाउण्ड्री की नींव तो गहरी ही खुदवाएं। नीचे से डेढ़ या दो फुट मोटी पत्थर की दीवार बनवाएं किंतु प्लींथ से ऊपर दीवार की चौड़ाई कम से कम रखें।
2- भवन निर्माण से पूर्व ही बाउण्ड्री वॉल की नींव भर देनी चाहिए ताकि नकारात्मक प्रभाव को भूखण्ड में आने से रोका जा सके। 3- आगे की बाउण्ड्री वॉल पर लोहे की, सीमेंट की अथवा पत्थर की रैलिंग लगवाई जा सकती है। बाउण्ड्री वॉल व रैलिंग का शिल्प भवन के शिल्प से मेल खाता हुआ होना चाहिए।
4- सामने की बाउण्ड्री वॉल की ऊंचाई अधिक नहीं रखनी चाहिए ताकि हवा व प्रकाश अवरुद्ध न हो सके।
5- चारदीवारी घर की सुरक्षा के साथ-साथ घर में अतिरिक्त ऊर्जा के प्रवाह को रोकने में भी मदद करती है।
6- चारदीवारी टूटी-फूटी न हो, टूट-फूट या प्लास्टर उखडऩे पर तुरंत मरम्मत करवा दें।

कैसी हो घर की बाउण्ड्री वॉल? – kaise ho ghar ki boundary wall? – वास्तु और कक्ष दशा – vastu aur kaksha dasham

 

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