घरेलू उपचार

typhoid

टाइफाइड – घरेलू उपचार – typhoid – gharelu upchar

परिचय- इस रोग के होने का सबसे प्रमुख कारण बैक्टीरिया का संक्रमण है। यह बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर में भोजन नली तथा आंतों में चले जाते हैं और फिर वहां से वे खून में चले जाते हैं और कुछ दिनों के बाद व्यक्ति को रोग ग्रस्त कर देते हैं। इस रोग में रोगी के शरीर […]

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piliya

पीलिया – घरेलू उपचार – piliya – gharelu upchar

परिचय : रक्त में लाल कणों की आयु 120 दिन होती है। किसी कारण से यदि इनकी आयु कम हो जाये तथा जल्दी ही अधिक मात्रा में नष्ट होने लग जायें तो पीलिया होने लगता है। रक्त में बाइलीरविन नाम का एक पीला पदार्थ होता है। यह बाइलीरविन लाल कणों के नष्ट होने पर निकलता

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ghamoriya

घमौरियां – घरेलू उपचार – ghamoriya – gharelu upchar

परिचय- घमौरी एक प्रकार का चर्मरोग है। यह रोग गर्मियों तथा बरसात के दिनों में व्यक्तियों की त्वचा पर हो जाता है। घमौरी होने का कारण:- यह रोग अधिक गर्मी के कारण तथा शरीर की ठीक प्रकार से सफाई न होने के कारण होता है। यह रोग व्यक्ति को कब्ज बनने के कारण भी हो

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atisaar

अतिसार – घरेलू उपचार – atisaar – gharelu upchar

परिचय: जब शरीर में मौजूद धातुएं कुपित होकर जठराग्नि को मन्द बनाकर खुद मल में घुल जाती है, तब अपानवायु उन्हें नीचे की ओर धकेलती है, जिसके कारण वे गुदा मार्ग से वेग की भांति निकलती हैं तो इसे अतिसार या दस्त का आना कहते हैं। आयुर्वेद के अनुभवियों के मतानुसार दस्त 6 प्रकार का

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masik-dharm mein dard

मासिक-धर्म में दर्द – घरेलू उपचार – masik-dharm mein dard – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. तारपीन: कमर तक गुनगुने पानी में बैठे और पेडू (नाभि) पर सेक करने के बाद तारपीन के तेल की मालिश करने से मासिक-धर्म की पीड़ा नष्ट हो जाती है। 2. बबूल: लगभग 250 ग्राम बबूल की छाल को जौकूट यानी पीसकर 2 लीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना लें। जब यह 500 मिलीलीटर

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yoni (stri ke janan ang) ko bada karna

योनि (स्त्रियों का जननांग) को बड़ी करना – घरेलू उपचार – yoni (stri ke janan ang) ko bada karna – gharelu upchar

परिचय: जिन महिलाओं की योनि (जननांग) बहुत छोटी होती है उसे सूचिवक्त्रा योनि कहते हैं। योनि के अधिक छोटी होने के कारण स्त्रियों को सहवास (मैथुन क्रिया) के समय बहुत अधिक कष्ट होता है। योनि (जननांग) छोटी होने के कारण कभी-कभी तो संभोग करते समय स्त्रियां बेहोश भी हो जाती हैं। चिकित्सा: 1. ऊंटकटैया: ऊंटकटैया

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banjhpan ke karan evam chikitsa

बांझपन का कारण एवं चिकित्सा – घरेलू उपचार – banjhpan ke karan evam chikitsa – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. कालानमक: स्त्री का माथा दुखे तो समझना चाहिए कि गर्भाशय खुश्क है। इसके लिए सेंधानमक, लहसुन, समुद्रफेन 5-5 ग्राम की मात्रा में पीसकर रख लें, फिर 5 ग्राम दवा को पानी में पीसकर रूई में लगाकर योनि के अन्दर गर्भाशय के मुंह पर सोते समय 3 दिन तक रखना चाहिए। इससे गर्भाशय की

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bhag pradaah

भग प्रदाह, भग की खुजली – घरेलू उपचार – bhag pradaah, bhag kee khujalee – gharelu upchar

परिचय: कभी-कभी जलन के साथ तो कभी बिना जलन के भग प्रदेश (योनि के आसपास) में खुजली होती है जो कि प्राय: फंगस के कारण होती है। यह कभी-कभी इतनी अधिक होती है कि स्त्री निर्लज्जता के कारण खुजलाने को बाध्य हो जाती है। विभिन्न औषधियों से उपचार: सुहागा लगभग 100 मिलीलीटर जल में 4

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doodh ka badhana

दूध का बढ़ाना – घरेलू उपचार – doodh ka badhana – gharelu upchar

परिचय: शिशुओं का सर्वोत्तम भोजन मां का दूध है। बच्चे को दूध प्रसन्न मुद्रा में पिलाना चाहिए। क्रोध में दूध पिलाने से बच्चे के पेट में दर्द और ऐंठन होने लगती है। शिशु जन्म के प्रथम तीन दिन तक मां का दूध बच्चों को नहीं पिलाना चाहिए। कारण: प्रसूता स्त्रियों में देखा गया है कि

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garbh dharan (garbhasthapak karana)

गर्भधारण (गर्भ स्थापित करना) – घरेलू उपचार – garbh dharan (garbhasthapak karana) – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. मोरछली: मोरछली की छाल का चूर्ण खाने से गर्भ ठहरता है। 2. केसर: केसर और नागकेसर को 4-4 ग्राम की मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इसकी तीन पुड़िया मासिक-धर्म समाप्त होने के तुरंत बाद खाने से गर्भ स्थापित होता है। 3. हंसपदी: हंसपदी को बारीक पीसकर पीने से स्त्री का गर्भ स्थापित

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