ब्रह्मचर्य के नुकसान

lack of focus

ध्यान केंद्रित न होना – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Lack of focus – brahmacharya vigyan

  सेक्स से परहेज करना नपुंसकता का एक कारण बताया गया है। जब लोग परहेज रखकर सेक्स से दूरी बना लेते हैं तो उनमें अपराधबोध और एंजाइटी हो जाती है। कामेच्छा दबाने की यह प्रक्रिया जब बार-बार होती है तो समस्या की जड़ें फैल जाती हैं। दिमाग में एक भावनात्मक असंतुलन पैदा होता है और […]

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refraining from sex

सेक्स से परहेज करना – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Refraining from sex – brahmacharya vigyan

  कुछ लोग इस गलत धारणा में रहते हैं कि सेक्स से परहेज करना स्वास्थ्य व खुशी के लिए अच्छा है। वे अपनी तथाकथित ऊर्जा को सेक्स संबंधों से परहेज रखकर सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि सेक्स से दूर रहकर जिंदगी लंबी होती है, बदन हृष्टपुष्ट होता है और मानसिक

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scientific reasons for maintaining celibacy

ब्रह्मचर्य बनाए रखने के वैज्ञानिक कारण – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Scientific reasons for maintaining celibacy – brahmacharya vigyan

  ब्रह्मचर्य का शारीरिक, मानसिक व वाचिक वैसे तीनों प्रकार से पालन न होने पर पुरुष व स्त्री दोनों के शरीर में से सेक्स होर्मोन्स बाहर निकल जाते हैं | ये सेक्स होर्मोन्स ज्यादातर लेसीथीन, फोस्फरस, नाइट्रोजन व आयोडीन जैसे जरूरी तत्त्वों से बने हैं जो जीवन, शरीर और मस्तिष्क के लिए बहुत उपयोगी हैं|

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celibacy

ब्रह्मचर्य विज्ञान – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Celibacy – brahmacharya vigyan

  ब्रह्मचर्य के दो अर्थ होते हैं। जो ज़्यादातर लोग जानते हैं वो ये होता है कि संभोग(सेक्स) नहीं करना और ये बड़ी तुच्छ बात है। तुमने तो ब्रह्म को बिल्कुल लंगोटे से बांध दिया है। ब्रह्म को क्या पड़ी है कि तुम सेक्स कर रहे हो या नहीं। ब्रह्म का वास्तविक अर्थ है, ब्रह्म

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naming ceremony

नामकरण संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Naming ceremony – brahmacharya vigyan

  इस संस्कार का उदेश्य केवल शिशु को नाम भर देना नहीं है, अपितु उसे श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर उच्च से उच्चतर मानव निर्माण करना है। पश्चिमी सभ्यता में निरर्थक नाम रखने का अन्धानुकरण भारत में भी बढ़ता जा रहा है। उनके लिए चरक का सन्देश है कि नाम साभिप्राय होनें चाहिएं। नाम केवल सम्बोधन के

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psychology so real

मनोविज्ञान कितना यथार्थ – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Psychology so real – brahmacharya vigyan

  पाश्चात्य मनोवैज्ञानिक डॉ. सिग्मंड फ्रायड स्वयं कई शारीरिक और मानसिक रोगों से ग्रस्त था। ‘कोकीन’ नाम की नशीली दवा का वो व्यसनी भी था। इस व्यसन के प्रभाव में आकर उसने जो कुछ लिख दिया उसे पाश्चात्य जगत ने स्वीकार कर लिया और इसके फलस्वरूप आज तक वे शारीरिक और मानसिक रोगियों की संख्या

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caste ritual

जातकर्म संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Caste ritual – brahmacharya vigyan

  शिशु के विश्व प्रवेश पर उसके ओजमय अभिनन्दन का यह संस्कार है। इसमें सन्तान की अबोध अवस्था में भी उस पर संस्कार डालने की चेष्टा की जाती है। माता से शारीरिक सम्बन्ध टूटने पर उसके मुख नाकादि को स्वच्छ करना ताकि वह श्वास ले सके तथा दूध पी सके। यह सफाई सधी हुई दाई

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demarcation ceremony

सीमन्तोन्नयन संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Demarcation ceremony – brahmacharya vigyan

  सीमन्त शब्द का अर्थ है मस्तिष्क और उन्नयन शब्द का अर्थ है विकास। पुंसवन संस्कार शारीरिक विकास के लिए होता है तो यह मानसिक विकास के लिए किया जाता है। इस संस्कार का समय गर्भावस्था के चतुर्थ माह, चौथे में न कर पाए तो छठे, इसमें भी नहीं कर पाए तो आठवें माह में

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education to live a moderate life

संयमी जीवन जीने की शिक्षा – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Education to live a moderate life – brahmacharya vigyan

  विद्युत शक्ति के साथ खिलवाड़ किया जाएँ तो वो झटका मार देती है परन्तु यदि नियन्त्रित कर लिया जाए तो वह वरदान बन जाती है यह बात वासना एवं ब्रह्मचर्य के विषय में भी स्टीक बैठती है इसलिए ऋषि पतंजलि समाज को संयमी जीवन जीने की शिक्षा देते है। यद्यपि भारतीय धर्मग्रन्थों में ब्रह्मचर्य

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pusvan samskar

पुंसवन संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Pusvan Samskar – brahmacharya vigyan

  यह संस्कार गर्भावस्था के दूसरे व तीसरे माह में किया जाता है। इसका उदेश्य गर्भस्थ शिशु को पौरुषयुक्त अर्थात् बलवान, हृष्ट-पुष्ट,निरोगी, तेजस्वी, एवं सुन्दरता के लिए किया जाता है। चरक संहिता के अनुसार उकडूं बैठने, ऊंचे-नीचे स्थानों में फिरने, कठिन आसन पर बैठने, वायु-मलमूत्रादि के वेग को रोकने, कठोर परिश्रम करने, गर्म तथा तेज

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