mool nakshatra kaise dekhe

vrishabh lagna mool nakshatra

वृषभ लग्न मूल नक्षत्र – मूल नक्षत्र – Taurus constellation child marriage – vrishabh lagna mool nakshatra

वृषभ लग्न में केतु एकादश, चतुर्थ, पंचम, दशम नवम भाव में ठीक रहेगा वहीं गुरु की स्थिति तृतीय, एकादश, पंचम, सप्तम में शुभफलदायी होगी। vrishabh lagna mool nakshatra – वृषभ लग्न मूल नक्षत्र – वृषभ लग्न मूल नक्षत्र – Taurus constellation child marriage  

singh lagna mool nakshatra

सिंह लग्न मूल नक्षत्र – मूल नक्षत्र – Leo ascendant original Star – singh lagna mool nakshatra

सिंह लग्न में केतु पंचम, नवम, लग्न, चतुर्थ में व राशि स्वामी गुरु नवम, पंचम, लग्न, चतुर्थ द्वादश में हो तो उत्तम परिणाम मिलते हैं। ऐसा जातक माता, भूमि, भवन, भाग्यवान, प्रभावी, प्रशासनिक सेवाओं में सफल होता है। singh lagna mool nakshatra – सिंह लग्न मूल नक्षत्र – सिंह लग्न मूल नक्षत्र – Leo ascendant …

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revatee nakshatr ke jaatakon ka vyaktitv

रेवती नक्षत्र के जातकों का व्यक्तित्व – जन्म नक्षत्र का व्यक्तित्व पर प्रभाव – Revathi Constellation natives of personality – revatee nakshatr ke jaatakon ka vyaktitv

नक्षत्र मंडल में रेवती का स्थान २७वां हैं। यह आखिरी नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के विषय में ज्योतिषशास्त्र क्या कहता है आइये इसकी जानकारी प्राप्त करें।रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध होता है और राशि स्वामी बृहस्पति होता है । इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर इस …

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mool nakshatr havan saamagree

हवन सामग्री – मूल नक्षत्र और उनके प्रभाव – incense burner – mool nakshatr havan saamagree

चावल एक भाग,घी दो भाग बूरा दो भाग, जौ तीन भाग, तिल चार भाग,इसके अतिरिक्त मेवा अष्टगंध इन्द्र जौ,भोजपत्र मधु कपूर आदि। एक लाख मंत्र के एक सेर हवन सामग्री की जरूरत होती है,यदि कम मात्रा में जपना हो तो कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिये। mool nakshatr havan saamagree – मूल नक्षत्र हवन सामग्री …

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mool sangyak nakshatr aur unaka prabhaav

मूल संज्ञक नक्षत्र और उनका प्रभाव – मूल नक्षत्र और उनके प्रभाव – Original nounal constellation and their effects – mool sangyak nakshatr aur unaka prabhaav

ज्येष्ठा आश्लेषा और रेवती,मूल मघा और अश्विनी यह नक्षत्र मूल नक्षत्र कहलाये जाते है,इन नक्षत्रों के अन्दर पैदा होने वाला जातक किसी न किसी प्रकार से पीडित होता है,ज्येष्ठा के मामले में कहा जाता है,कि अगर इन नक्षत्र को शांत नही करवाया गया तो यह जातक को तुरत सात महिने के अन्दर से दुष्प्रभाव देना …

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