ब्रह्मचर्य-विज्ञान

celibacy

ब्रह्मचर्य विज्ञान – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Celibacy – brahmacharya vigyan

  ब्रह्मचर्य के दो अर्थ होते हैं। जो ज़्यादातर लोग जानते हैं वो ये होता है कि संभोग(सेक्स) नहीं करना और ये बड़ी तुच्छ बात है। तुमने तो ब्रह्म को बिल्कुल लंगोटे से बांध दिया है। ब्रह्म को क्या पड़ी है कि तुम सेक्स कर रहे हो या नहीं। ब्रह्म का वास्तविक अर्थ है, ब्रह्म […]

ब्रह्मचर्य विज्ञान – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Celibacy – brahmacharya vigyan Read More »

for married young men

विवाहित युवक-युवतियों के लिए – ब्रह्मचर्य विज्ञान | For married young men – brahmacharya vigyan

  प्रत्येक नवविवाहित युवक-युवती को डॉ.कोवन की निम्न पंक्यिताँ अवश्य ध्यान में रखनी चाहिएः “नई शादी करके पुरुष तथा स्त्री विषय भोग की दलदल में जा धँसते हैं। विवाह के प्रारम्भ के दिन तो मानों व्यभिचार के दिन होते हैं। उन दिनों ऐसा जान पड़ता है, जैसे विवाह जैसी उच्च तथा पवित्र व्यवस्था भी मनुष्य

विवाहित युवक-युवतियों के लिए – ब्रह्मचर्य विज्ञान | For married young men – brahmacharya vigyan Read More »

secret of celibacy

ब्रह्मचर्य का रहस्य – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Secret of celibacy – brahmacharya vigyan

  ► परिचय एक बार ऋषि दयानंद से किसी ने पूछाः “आपको कामदेव सताता है या नहीं ?” उन्होंने उत्तर दियाः “हाँ वह आता है, परन्तु उसे मेरे मकान के बाहर ही खड़े रहना पड़ता है क्योंकि वह मुझे कभी खाली ही नहीं पाता।” ऋषि दयानंद कार्य में इतने व्यस्त रहते थे कि उन्हें सामान्य

ब्रह्मचर्य का रहस्य – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Secret of celibacy – brahmacharya vigyan Read More »

best brahmacharya yoga in vrat

व्रतों में श्रेष्ठ ब्रह्मचर्य योग – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Best Brahmacharya Yoga in Vrat – brahmacharya vigyan

  अष्टांग योग के प्रथम अंग यम का चतुर्थ चरण है ब्रह्मचर्य (brahmacharya yoga)। सिद्धि या सफलता प्राप्त करने के लिए यह अति आवश्यक है। ब्रह्मचर्य का पालन करना सर्वाधिक कठिन माना गया है। ब्रह्मचर्य का अर्थ भी व्यापक है। आमतौर पर गुप्तेंद्रियों पर संयम रखना ही ब्रह्मचर्य माना जाता है जबकि ब्रह्मचर्य का शाब्दिक

व्रतों में श्रेष्ठ ब्रह्मचर्य योग – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Best Brahmacharya Yoga in Vrat – brahmacharya vigyan Read More »

what is the need of celibacy

ब्रह्मचर्य की क्या जरूरत है – ब्रह्मचर्य विज्ञान | What is the need of celibacy – brahmacharya vigyan

  जो लोग ब्रह्मचर्य को सिर्फ पुराना और किताबी मानकर अपने मन मुखी जीवन का आनंद उठाने की ललक मे रहते हैं और अपने को वैज्ञानिक समझ वालों की श्रेणी मे समझते हैं, वे ब्रह्मचर्य की ऊर्जा के आनंद से रीते रह जाते हैं. हमारे भीतर एक जीवनी ऊर्जा शक्ति होती है, वह जब बढती

ब्रह्मचर्य की क्या जरूरत है – ब्रह्मचर्य विज्ञान | What is the need of celibacy – brahmacharya vigyan Read More »

brahmacharya sixteen rites

ब्रह्मचर्य सोलह संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Brahmacharya Sixteen Rites – brahmacharya vigyan

  ► गर्भाधान संस्कार स्वस्थ सुसंस्कृत युवक एवं युवती जो आयु परिपुष्ट हों सुमन, सुचित्त होकर परिवार हेतु सन्तान प्राप्ति के उद्देश्य से इस संस्कार को करते हैं। वैदिक संस्कृति में गर्भाधान को श्रेष्ठ गुण, कर्म, स्वभाववाली आत्मा को बुलाने के लिए धार्मिक पवित्र यज्ञ माना गया है। जैसे अच्छे वृक्ष या खेती के लिए

ब्रह्मचर्य सोलह संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Brahmacharya Sixteen Rites – brahmacharya vigyan Read More »

funeral

अन्त्येष्टि संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Funeral – brahmacharya vigyan

  इसका नाम नरमेध, पुरुषमेध या पुरुषयाग भी है। यह मृत्यु के पीछे उसके शरीर पर किया जाता है। संसार में प्रचलित अन्य पद्धतियों में षवदाह की वैदिक पद्धति ही सर्वश्रेष्ठ पद्धति है।विश्वभर के लोग मरने पर मृतक शरीर को पृथ्वी, जल, अग्नि व वायु इन तत्वों में से किसी एक की भेंट कर देते

अन्त्येष्टि संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Funeral – brahmacharya vigyan Read More »

prevention of dreams

स्वप्नदोष का निवारण – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Prevention of dreams – brahmacharya vigyan

  वर्तमान समय में कामुकता अत्यधिक बडती जा रही हे, आज के युवा संयम का पालन नहीं कर रहें हें जिसके कारण आज गुप्त रोग अत्यधिक बड़ता जा रहा हें। काम वासना के विकार हमारें शरीर को हिलाकर रख देते हें , हमें शक्तिहीन व निस्तेज बना देतें हें , शरीर में जहर घोल देतें

स्वप्नदोष का निवारण – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Prevention of dreams – brahmacharya vigyan Read More »

renunciation ceremony

संन्यास संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Renunciation ceremony – brahmacharya vigyan

  संन्यास = सं + न्यास। अर्थात् अब तक लगाव का बोझ जो उसके कन्धों पर है, उसे उठाकर अलग धर देना। मोहादि आवरण पक्षपात छोड़ के विरक्त होकर सब पृथ्वी में परोपकारार्थ विचरना।संन्यास ग्रहण के प्रथम प्रकार को क्रम संन्यास कहते हैं। जिसमें क्रमश: ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ होके संन्यास लिया जाता है। द्वितीय प्रकार

संन्यास संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Renunciation ceremony – brahmacharya vigyan Read More »

student morning

विद्यार्थी प्रातःकाल – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Student morning – brahmacharya vigyan

  विद्यार्थी प्रातःकाल सूर्य उदय होने से एक घण्टा पहले शैया त्यागकर शौचादि से निवृत हो व्यायाम करे या वायु-सेवनार्थ बाहर मैदान में जावे। सूर्य उदय होने के पाँच-दस मिनट पूर्व स्नान से निवृत होकर यथा-विश्‍वास परमात्मा का ध्यान करे। सदैव कुऐं के ताजे जल से स्नान करे। यदि कुऐं का जल प्राप्‍त हो तो

विद्यार्थी प्रातःकाल – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Student morning – brahmacharya vigyan Read More »

Scroll to Top