मांगलिक दोष परिहार

symptoms of manglik dosha

मांगलिक दोष के लक्षण – मांगलिक दोष | Symptoms of Manglik Dosha – manglik dosh

  1. मंगल को उग्रता वाला गृह माना जाता है इसलिए मांगलिक दोष वाले लोगों का स्वाभाव गर्म माना जाता है| ऐसे लोग कटु भाषी होते हैं , पर होते हैं दिल के साफ़. 2. मांगलिक लोगों में बहुत गर्म और उग्र ऊर्जा होता है जिसका यदि सही इस्तेमाल नहीं किया जाए तो यह कुछ […]

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manlike man personality

मांगलिक पुरुष व्यक्तित्व – मांगलिक दोष | Manlike man personality – manglik dosh

  अनुशासन के पक्के,चीज़ों को सलीके से सहेजने वाले,भावुक्ताओं की सीमाओं को लांघने वाले,उकसाने पर अपना भला बुरा छोड़ कर दूसरों के लिए सब कुछ करने वाले,यह ही हैं मांगलिक इंसान के गुण।इनकी एक खूबी और भी होती है।इनके खुद के काम सदा अधूरे पड़े रहते हैं क्योंकि इनके पास सबके लिए समय होता है

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do not feel guilty

मांगलिक दोष नहीं लगता – मांगलिक दोष | Do not feel guilty – manglik dosh

  मंगल भी निम्न लिखित परिस्तिथियों में दोष कारक नहीं होगा : * यदि जन्म कुन्डली के प्रथम भाव में मंगल मेष राशि का हो, द्वादस भाव में धनु राशि का हो, चौथे भाव में वृश्चिक का हो, सप्तम भाव में मीन राशि का हो और आठवें भाव में कुम्भ राशि का हो, तो मांगलिक

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donation of mars

मंगल वस्तुओ का दान – मांगलिक दोष | Donation of Mars – manglik dosh

  1। मंगल ग्रह से संबंधित वस्तुओ का दान करने से मंगल ग्रह शांति होती है जैसे मसूर की दाल, तॉबे का बर्तन एवं सिक्का, व कम से कम एक मूंगा व यथा शक्ति दक्षिणा रखकर लाल कपडे की पोटली बनायें एवं मंगलवार के दिन अथवा जिस दिन मेष या वृश्चिक राशि में चंदमा हो

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manglik nature

मांगलिक जातक का स्वभाव – मांगलिक दोष | Manglik’s nature – manglik dosh

  कोई जातक चाहे वह स्‍त्री हो या पुरुष उसके मांगलिक होने का अर्थ है कि उसकी कुण्‍डली में मंगल अपनी प्रभावी स्थिति में है. शादी के लिए मंगल को जिन स्‍थानों पर देखा जाता है वे 1,4,7,8 और 12 भाव हैं. इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव सामान्‍य तौर पर खराब माना जाता

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mangalnath ujjain

मंगलनाथ उज्जैन – मांगलिक दोष | Mangalnath Ujjain – manglik dosh

  मंगलनाथ उज्जैन के प्राचीन शहर में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र मंदिर है। यह मंदिर मुख्य शहर के शोर और भीड़भाड़ से दूर स्थित है। यह मंदिर शिप्रा नदी के पास स्थित है। मत्स्य पुराण के अनुसार ऐसी मान्यता है कि मंगलनाथ मंगल ग्रह का जन्म स्थान है। इस मंदिर में आने

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what is manglik defect?

क्या होता हैं मांगलिक दोष? – मांगलिक दोष | What is Manglik defect? – manglik dosh

  जहां एक ओर मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति और प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है. कुण्डली में जब प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है तब मंगलिक दोष (manglik dosha)लगता है. लेकिन सिर्फ इतने से ही

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manglik dosha and marital life

मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन – मांगलिक दोष | Manglik Dosha and Marital Life – manglik dosh

  वैदिक ज्योतिष में मंगल को लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में दोष पूर्ण माना जाता है।इन भावो में उपस्थित मंगल वैवाहिक जीवन के लिए अनिष्टकारक कहा गया है।जन्म कुण्डली में इन पांचों भावों में मंगल के साथ जितने क्रूर ग्रह बैठे हों मंगल उतना ही दोषपूर्ण होता है जैसे दो क्रूर

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mythological accounts

पौराणिक वृत्यांत – मांगलिक दोष | Mythological accounts – manglik dosh

  मंगल ग्रह की उत्पत्ति का पौराणिक वृत्यांत स्कंद पुराण के अवंतिका खण्ड में आता है की एक समय उज्जयिनी पुरी में अंधक नाम से प्रसिद्ध दैत्य राज्य करता था | उसके महापराक्रमी पुत्र का नाम कनक दानव था | एक बार उस महाशक्तिशाली वीर ने युध्य के लिए इन्द्र को ललकारा तब इन्द्र ने

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mantra of mangal dev

मंगल देव का मंत्र – मांगलिक दोष | Mantra of Mangal Dev – manglik dosh

  ऊं नमोअर्हते भगवते वासुपूज्य0 तीर्थंकराय षण्मुरखयक्ष | गांधरीयक्षी सहिताय ऊं आं क्रों ह्रीं ह्र: कुंज महाग्रह मम दुष्टहग्रह, रोग कष्ट् निवारणं सर्व शान्तिं च कुरू कुरू हूं फट् || 11000 जाप्य || मध्यकम यंत्र- ऊं आं क्रौं ह्रीं श्रीं क्लीं भौमारिष्टभ निवारक श्री वासुपूज्यं जिनेन्द्रा य नम: शान्तिं कुरू कुरू स्वाकहा || 10000 स्वाहहा

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