घरेलू उपचार

atisaar

अतिसार – घरेलू उपचार – atisaar – gharelu upchar

परिचय: जब शरीर में मौजूद धातुएं कुपित होकर जठराग्नि को मन्द बनाकर खुद मल में घुल जाती है, तब अपानवायु उन्हें नीचे की ओर धकेलती है, जिसके कारण वे गुदा मार्ग से वेग की भांति निकलती हैं तो इसे अतिसार या दस्त का आना कहते हैं। आयुर्वेद के अनुभवियों के मतानुसार दस्त 6 प्रकार का […]

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garbh dharan (garbhasthapak karana)

गर्भधारण (गर्भ स्थापित करना) – घरेलू उपचार – garbh dharan (garbhasthapak karana) – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. मोरछली: मोरछली की छाल का चूर्ण खाने से गर्भ ठहरता है। 2. केसर: केसर और नागकेसर को 4-4 ग्राम की मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इसकी तीन पुड़िया मासिक-धर्म समाप्त होने के तुरंत बाद खाने से गर्भ स्थापित होता है। 3. हंसपदी: हंसपदी को बारीक पीसकर पीने से स्त्री का गर्भ स्थापित

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garbh ka taqatwar hona

गर्भ का ताकतवर होना – घरेलू उपचार – garbh ka taqatwar hona – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. तिल: धुले हुए तिल और जौ 20-20 ग्राम की मात्रा में कूटछानकर इसमें लगभग 40 ग्राम की मात्रा में खांड मिला दें। इसकी 5 ग्राम की मात्रा सुबह शहद के साथ सेवन करने से गर्भ सुदृढ़ होता है। 2. पीपल: पीपल की जटा, समुद्रफल और सालम मिश्री सभी को बराबर की मात्रा में

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garbh ki raksha karna

गर्भ की रक्षा करना – घरेलू उपचार – garbh ki raksha karna – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. मुलहठी: जिन स्त्रियों को गर्भपात का भय रहता हो उन्हें मुलहठी पंच, तृण, तथा कमल की जड़ का काढ़ा हर महीने एक सप्ताह दूध में औटाकर घी डालकर पीना चाहिए। 2. नीलोफर: नीलोफर, कमल के फूल, कुमुद के फूल तथा मुलहठी का काढ़ा बनाकर दूध में औटाये तथा इसमें मिश्री मिलाकर पिलाने से

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masik-dharm shuru hone ki pehchaan

मासिक-धर्म शुरू होने की पहचान – घरेलू उपचार – masik-dharm shuru hone ki pehchaan – gharelu upchar

परिचय: जब किसी स्त्री को रजोदर्शन (माहवारी) होने को होता है तो उसके पेडु (नाभि) में भारीपन, कमर में दर्द, बेचैनी, थकावट, शरीर का भारी हो जाना, कभी-कभी शरीर का भार कम हो जाना और शौच की इच्छा बार-बार होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इनमें से यदि कुछ चिन्ह दिखाई पड़े तो समझ लेना

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maahavaaree (masik dharm) ke sabhi doshon ko door karna

माहवारी (मासिक धर्म) के सभी दोषों को दूर करना – घरेलू उपचार – maahavaaree (masik dharm) ke sabhi doshon ko door karna – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. किशमिश: पुरानी किशमिश को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे लगभग 200 मिलीलीटर पानी में रात को भिगोकर रख दें। सुबह इसे उबालकर रख लें। जब यह एक चौथाई की मात्रा में रह जाए तो इसे छानकर सेवन करने से मासिक-धर्म के सभी दोष नष्ट हो जाते हैं। 2. तिल: काले तिल

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banjhpan ke karan evam chikitsa

बांझपन का कारण एवं चिकित्सा – घरेलू उपचार – banjhpan ke karan evam chikitsa – gharelu upchar

चिकित्सा: 1. कालानमक: स्त्री का माथा दुखे तो समझना चाहिए कि गर्भाशय खुश्क है। इसके लिए सेंधानमक, लहसुन, समुद्रफेन 5-5 ग्राम की मात्रा में पीसकर रख लें, फिर 5 ग्राम दवा को पानी में पीसकर रूई में लगाकर योनि के अन्दर गर्भाशय के मुंह पर सोते समय 3 दिन तक रखना चाहिए। इससे गर्भाशय की

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bhag pradaah

भग प्रदाह, भग की खुजली – घरेलू उपचार – bhag pradaah, bhag kee khujalee – gharelu upchar

परिचय: कभी-कभी जलन के साथ तो कभी बिना जलन के भग प्रदेश (योनि के आसपास) में खुजली होती है जो कि प्राय: फंगस के कारण होती है। यह कभी-कभी इतनी अधिक होती है कि स्त्री निर्लज्जता के कारण खुजलाने को बाध्य हो जाती है। विभिन्न औषधियों से उपचार: सुहागा लगभग 100 मिलीलीटर जल में 4

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doodh ka badhana

दूध का बढ़ाना – घरेलू उपचार – doodh ka badhana – gharelu upchar

परिचय: शिशुओं का सर्वोत्तम भोजन मां का दूध है। बच्चे को दूध प्रसन्न मुद्रा में पिलाना चाहिए। क्रोध में दूध पिलाने से बच्चे के पेट में दर्द और ऐंठन होने लगती है। शिशु जन्म के प्रथम तीन दिन तक मां का दूध बच्चों को नहीं पिलाना चाहिए। कारण: प्रसूता स्त्रियों में देखा गया है कि

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napunsakta

नपुंसकता – घरेलू उपचार – napunsakta – gharelu upchar

परिचय : जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के

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