chandra mangal yoga

चन्द्र मंगल योग – वैदिक ज्योतिष शास्त्र | Chandra Mangal Yoga – vaidik jyotish Shastra

 

वैदिक ज्योतिष में चन्द्र मंगल योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार यदि किसी कुंडली में चन्द्रमा तथा मंगल कुंडली के एक ही घर में स्थित हो जाते हैं तो ऐसी कुंडली में चन्द्र मंगल योग का निर्माण हो जाता है। चन्द्र मंगल योग द्वारा प्रदान किये जाने वाले फलों के लेकर विभिन्न ज्योतिषी भिन्न भिन्न मत रखते हैं। कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में बनने वाला चन्द्र मंगल योग शुभ होता है तथा इस योग के कारण जातक को विभिन्न प्रकार के शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं जबकि कुछ अन्य ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में बनने वाला चन्द्र मंगल अशुभ होता है तथा इस योग के कारण जातक को विभिन्न प्रकार के अशुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। आज के इस लेख में हम चन्द्र मंगल योग के कुंडली में निर्माण तथा इस योग के शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा करेंगे।

► चन्द्रमा तथा मंगल के संयोग
कुंडली में चन्द्रमा तथा मंगल के संयोग से बनने वाला चन्द्र मंगल योग जातक को कुंडली में चन्द्रमा तथा मंगल के स्वभाव, बल तथा स्थिति आदि के आधार पर विभिन्न प्रकार के शुभ अशुभ फल प्रदान कर सकता है। किसी कुंडली में शुभ चन्द्रमा तथा शुभ मंगल का संयोग हो जाने से बनने वाले चन्द्र मंगल योग का परिणाम निश्चिय ही शुभ फलदायी होगा तथा इस प्रकार के चन्द्र मंगल योग के प्रभाव में आने वाले जातक को उसकी कुंडली में चन्द्र तथा मंगल की स्थिति तथा बल के आधार पर भिन्न भिन्न प्रकार के शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। उदाहरण के लिए किसी कुंडली के पांचवे घर में बनने वाला शुभ चन्द्र मंगल योग जातक को धन, समृद्धि, कलात्मकता आदि जैसे शुभ फल प्रदान कर सकता है जबकि किसी कुंडली के दसवें घर में बनने वाला शुभ चन्द्र मंगल योग जातक को व्यवसायिक सफलता तथा ख्याति प्रदान कर सकता है। इस प्रकार शुभ चन्द्रमा तथा शुभ मंगल के संयोग से बनने वाला चन्द्र मंगल योग कुंडली के विभिन्न घरो तथा विभिन्न राशियों में अपनी स्थिति के आधार पर भिन्न भिन्न प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है।

► कुंडली में चन्द्रमा तथा मंगल दोनों के अशुभ
दूसरी ओर किसी कुंडली में चन्द्रमा तथा मंगल दोनों के अशुभ होने की स्थिति में इनके संयोग से बनने वाला चन्द्र मंगल योग निश्चय ही अशुभ फलदायी तथा अमंगलकारी होता है जो जातक को उसके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के कष्ट दे सकता है जिनका निर्णय कुंडली में इस प्रकार के अशुभ चन्द्र मंगल योग की स्थिति तथा बल आदि से किया जाता है। उदाहरण के लिए किसी कुंडली के दसवें घर में बनने वाले अशुभ चन्द्र मंगल योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अनैतिक तथा अवैध कार्यों में संलग्न हो सकते हैं, इनमें से कुछ जातक स्त्रियों से वेश्यावृति जैसे कार्य करवा के धन कमाने वाले भी हो सकते हैं तथा इस दोष के बहुत प्रबल होने पर ऐसा जातक अपनी सगी बहनों तथा अन्य स्त्री रिश्तेदारों को भी वेश्यावृति के गंदे व्यवसाय में धन कमाने के लिए धकेल सकता है। अशुभ चन्द्र मंगल योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने आर्थिक लाभ के लिए अपने सगे संबंधियों तथा भाई बहनों को भी आसानी से धोखा दे सकते हैं जिसके चलते समाज में इन जातकों का कोई आदर तथा सम्मान नहीं होता। कुंडली के चौथे घर में बनने वाला चन्द्र मंगल योग जातक के वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिनमें पति पत्नि की बीच होने वाली शारिरिक हिंसा भी शामिल है। इस प्रकार किसी कुंडली में बनने वाला अशुभ चन्द्र मंगल योग कुंडली में अपने बल तथा स्थिति आदि के आधार पर जातक को विभिन्न प्रकार के अशुभ फल प्रदान कर सकता है।

संपूर्ण चाणक्य निति
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