vedic astrology and ayurveda

वैदिक ज्यौतिष और आयुर्वेद – वैदिक ज्योतिष शास्त्र | Vedic Astrology and Ayurveda – vaidik jyotish Shastra

 

वैदिक ज्योतिष एक प्राचीन विज्ञान है जो सार्वभौमिक और कालातीत है.ज्ञान के इस विशाल सागर में सभी सांसारिक घटनाएँ वे चाहे अतीत, वर्तमान और भविष्य से सम्बन्ध क्यों ना रखती हों, परन्तु यह सर्वविदित सत्य है की वह घटना इस महान विद्या से सम्बन्ध रखती हैं वैदिक ज्योतिष जो जीवन की विविधता के भीतर एकता व्यक्त करता है , और एक अंतर्निहित महान परिशुद्धता और करुणा के साथ सब बातों को संचालित करता है और इन विचारों का समर्थन प्रकृति के नियमों पर आधारित है.वैदिक ज्योतिष के लिए मानव जाति एक उपकरण हैं और जो प्रकृति के साथ अधिक से अधिक सद्भाव में रहते हैं, जिसका उपयोग मानव जाति को विकास के लिए अधिकतम अवसरों को प्रदान करना और न्यूनतम असफलता के लिए है

► पौधों, पशुओं, मानव के उपर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष पृथ्वी पर आकाश से उत्पन्न ऊर्जा का सूक्ष्म जीवों ,पौधों, पशुओं, मानव के उपर प्रभाव का अध्ययन है.यह ऊर्जा ,सभी स्तरों पर मानव शरीर और मन को प्रभावित कर रही हैं.ज्यौतिष कुंडली में व्यक्ति के रोगों का ना केवल सकेंत बल्कि उसके अच्छे या बुरे स्वास्थ्य,कमजोर जीवन शक्ति, रोगों की प्रवृति, दुर्घटनाएं ,भावनात्मक स्थिरता और अस्थिरता ,बौद्धिक सुदृढ़ता के बारे में बताते हैं अपितु इन रोगों के कारक भी है इसलिए ग्रहों की भुमिकों को कम नहीं आंकना चाहिए

► वैदिक ज्ञान के उपर आधारित
भारत के प्राचीन ऋषि और मुनियों ने प्रकृति और मानव जाति के बीच के घनिष्ट सम्बन्धों को समझा , और इस प्राकृतिक सम्बन्ध का एक परिणाम के रूप में एक स्वास्थ्य होने की एक प्रणाली विकसित की जिसे आयुर्वेद कहा गया है.हालांकि पश्चिमी जगत की सोच क्वांटम भौतिकी की खोज के साथ कुछ स्तर तक इस ज्ञान को अपनाने के लिए बाध्य हुई , जो वैदिक ज्ञान के उपर आधारित और सहस्रों वर्षों के शोध का परिणाम है

► सामर्थ्य चिकित्सक को प्रदान करता है
वेद समग्र रूप में और समकालीन सन्दर्भ में ज्ञान का सम्पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं. मानव रोग ग्रहों की गुरुत्वाकर्षण, घूर्णन, भ्रमण की शक्ति का परिणाम है ज्योतिष और आयुर्वेद के घनिष्ट सम्बन्धों को इनके परिणामो के साथ जोड़ा जा सकता है आयुर्वेदिक चिकित्सक ,ज्योतिष को एक उपकरण की भांति प्रयोग कर सकते है ज्योतिष, चिकित्सक को रोगी के कर्म और ग्रहों के अनूकुल बनाने में सहायता करता है जो रोगों की अवधि और रोग के ठीक होने का समय पूर्ण रूप से बताने का सामर्थ्य चिकित्सक को प्रदान करता है

► ज्योतिष शास्त्र रोगों के बारे में
ज्योतिष शास्त्र रोगों के बारे में संकेत देता है जबकि आयुर्वेद शरीरिक विश्लेषण के पश्चात उसके दोषों जिन्हें आयुर्वेद में त्रिदोष कहा जाता है या जैविक शारीरिक द्रव्य की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करता है ये त्रिदोष वात ,पित और कफ के नाम से जाने जाते है वात ,पित और कफ जो शरीर में शारीरिक पदार्थ की तरह विद्यमान है समान रूप से गति करते हैं वात गति,पित्त गर्मी और प्रकाश और कफ स्थूलता और स्थिरता का संकेत है महान आयुर्वैदिक आचार्य सुश्रुत का कहना है कि जिस प्रकार इस विश्व में सूर्य ,चन्द्र और वायु जीवन के लिए आवश्यक हैं उसी प्रकार शरीर में वात , पित्त और कफ मानव शरीर के स्वास्थ्य में विनियमन के लिए आवश्यक हैं जब ब्रहामंड में गतिमान ग्रह असंतुलित हो जाते हैं तो मानव शरीर में वात ,पित्त और कफ के बीच असंतुलन मानव शरीर को अस्वस्थ बना देता है

► वैदिक ज्योतिष जवाहरात
वैदिक ज्योतिष जवाहरात, मंत्रों, और अनुष्ठानों के उपचारात्मक उपायों के लिए प्रसिद्ध है, यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे मानव जीवन में ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा लाने के क्रम में परिवर्तन और उस परिवर्तन को शक्तिशाली विधियों से नकारात्मक उर्जा को कम करने के लिए इन विधियों को हम अपने जीवन के कर्मों और आध्यत्मिक उत्थान के लिए प्रयोग में लाते हैं और इन्ही उपचारों को आयुर्वेद के सम्बन्ध में भी प्रयोग किया जा सकता है आयुर्वेद ना केवल सकारात्मक कर्म और आध्यत्मिक उत्थान के लिए है बल्कि उचित जीवन शैली,आहार – विहार , जड़ी -बूटी ,व्यायाम और उचित व्यवहार सिखाता है और ज्योतिष इस ज्ञान को समग्र रूप मे इसे मानव जीवन को निरोग बनाने में सहयता और उपचारात्मक उपाय प्रदान करता है

► ओषधि प्रणाली विकसित की है
पश्चिमी जगत ने जो उपचारात्मक ओषधि प्रणाली विकसित की है वह प्रणाली शरीर के एक भाग उपचार करती हैं और इस बात को अनदेखा करते हैं कि यह भी शरीर का ही भाग है यह दृष्टिकोण उपचार के अन्तर्निहित कारणों के उपचार पर ध्यान ना दे कर केवल शरीर के केवल उस भाग का उपचार के लिए कुख्यात हो गयी है यह शरीर को समग्र रूप में ना लेकर केवल शरीर के उस भाग को ही पूर्ण मान कर उपचार करते है इस प्रक्रिया में यह प्रणाली अक्सर उपचार के बजाय कई दुष्प्रभावों को जन्म देती है इसके विपरीत आयुर्वेद शरीर को समग्र रूप में शरीर ही नहीं मन और आत्मा से सम्बन्ध बनाता है पश्चिमी जगत की उपचारात्मक प्रणाली ज्योतिष या ग्रहों का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है इस विचार के बिना ही रोग का उपचार करने की कोशिश करता है और इसलिए कई अनावश्यक और परिहार्य कठिनाइयों को जन्म देता है और उपचार्धीन व्यक्ति अंन्य अनेकों व्याधियों से ग्रस्त हो जाता है और एक अनंत के चक्र में फंस कर अपने जीवन को दुष्कर ही नहीं दुस्साध्य बना लेता है

संपूर्ण चाणक्य निति
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