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शादी में कुंडली मिलाने का क्या अर्थ हैशादी में कुंडली मिलाने का क्या अर्थ हैं – पहला दिन – Day 1 – 21 Din me kundli padhna sikhe – shaadee mein kundalee milaane ka kya arth hain – Pahla Din

कुंडली मिलाना अर्थात् ज्योतिष विज्ञान का अध्ययन करना। ज्योतिष विज्ञान के अंतर्गत लड़का और लड़की के जन्म स्थान, जन्म दिनांक और अन्य जानकारियों के आधार पर कुंडली बनाई जाती हैं और फिर दोनों की कुंडलियों का अध्ययन करके ये पता लगाने की कोशिश की जाती हैं कि उनके भावी जीवन में परस्पर सामंजस्य होगा या नहीं। सामान्यतः कुंडली में उस मनुष्य के करियर, स्वभाव, स्वास्थ्य और संपूर्ण जीवन के विषय में वर्णन किया जाता हैं। शादी के लिए कुंडली मिलाते समय गुण आदि के मिलने से संबंधित बातें ध्यान में रखी जाती हैं।

शादी के लिए लड़का और लड़की की कुंडली का अध्ययन करते समय 36 गुणों और 8 कूटा में से कितने गुण मिल रहें हैं और कितने मिलने चाहिए, जैसी बातों पर विचार किया जाता हैं। इस संबंध में निम्न लिखित तालिका का अध्ययन मदद कर सकता हैं

क्रमांक – लड़का और लड़की की कुंडली में मिले गुणों की संख्या – शादी होने पर भावी परिणाम

1. 18 अथवा इससे कम गुण मिलने पर – इस स्थिति में शादी होने पर इसके असफल होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं।

2. 18 – 24 गुण मिलने पर – इस स्थिति में हुई शादी सफल तो हो सकती हैं, परन्तु इसमें कई समस्याएँ आ सकती हैं।

3. 25 – 32 गुण मिलने पर – इस प्रकार से कुंडलियों के मिलने से सफल वैवाहिक जीवन के संकेत प्राप्त होते हैं।

4. 32 – 36 गुण मिलने पर – शादी के लिए सर्वोत्तम साथी। इस प्रकार की शादियों में समस्याएं उत्पन्न ही नहीं होती, और अगर हो भी तो वे रिश्ते पर बुरा प्रभाव नहीं डालती।

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