grah ka paap prabhav hona

ग्रह का पाप प्रभाव होना – राशिनुसार पुरुष रोग का उपाय – grah ka paap prabhav hona – raashinusaar purush rog ka upaay

ग्रह का पाप प्रभाव होना
कुंडली में षठा (६) घर रोग का स्थान है!अष्टम घर मृत्यु का और बाहरवा 12 घर वयय खर्चे का स्थान है!जो ग्रह कुंडली के ६ भाव वे भाव में हो!अष्टम भाव में हो!बाहरवे भाव में हो छटेघर के मालिक से जो ग्रह छटे घर के मालिक के साथ हो! दूसरे घर के मालिक और सप्तम घर को मारक स्थान कहते है!

सूर्य हृदय का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका भाव पंचम है। जब पंचम भाव, पंचमेश तथा सिंह राशि पाप प्रभाव में हो तो हार्ट अटैक की सम्भावना बढ़ जाती है। सूर्य पर राहु या केतु में से किसी एक ग्रह का पाप प्रभाव होना भी आवश्यक है। जीवन में घटने वाली घटनाएं अचानक ही घटती हैं जोकि राहु या केतु के प्रभाव से ही घटती हैं। हार्ट अटैक भी अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के आता है, इसीलिए राहु या केतु का प्रभाव आवश्यक है।

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*यदि षष्ठेश केतु के साथ हो तथा गुरु, सूर्य, बुध, शुक्र अष्टम भाव में हों, चतुर्थ भाव में केतु हो तो हृदय रोग होता है।

*चतुर्थेश लग्नेश, दशमेश व व्ययेश के साथ आठवें हो और अष्टमेश वक्री होकर तृतीयेश बनकर तृतीय भाव में हो व एकादश भाव का स्वामी लग्न में हो तो जातक को हृदय रोग होता है।

*षष्ठेश की अष्टम भाव में स्थित गुरु, सूर्य, बुध, शुक्र पर दृष्टि हो तो जातक हृदय रोग से पीड़ित होता है।

*शनि दसवीं दृष्टि से मंगल को पीड़ित करे, बारहवें भाव में राहु तथा छठे भाव में केतु हो, चतुर्थेश व लग्नेश अष्टम भाव में व्ययेश के साथ युत हो तो भी हृदय रोग होता है।

*सर्वविदित है की चौथा भाव और दसवां भाव हृदय कारक अंगों के प्रतीक हैं। चतुर्थ भाव का कारक चन्द्र भी आरोग्यकारक है। दशम भाव के कारक ग्रह सूर्य, बुध, गुरु व शनि हैं। पाचंवा भाव छाती, पेट, लीवर, किडनी व आंतों का है, ये अंग दूषित हों तो भी हृदय हो हानि होती है। यह भाव बुद्धि अर्थात्‌ विचार का भी है। गलत विचारों से भी रोग वृद्धि होती है।

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ग्रह का पाप प्रभाव होना – grah ka paap prabhav hona – राशिनुसार पुरुष रोग का उपाय – raashinusaar purush rog ka upaay

संपूर्ण चाणक्य निति
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