Theology

celibacy

ब्रह्मचर्य का पालन आचार्य – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Celibacy – brahmacharya vigyan

  ब्रह्मचर्य व्रत सभी व्रतों से श्रेष्ठ है। मन को साधने से ही ब्रह्मचर्य व्रत का पालन हो सकता है। यदि मन को वश में रखा जाए तो व्यक्ति गृहस्थ जीवन में भी साधना कर सकता है। यह बात आचार्य महाश्रमण ने समदड़ी प्रवास के तीसरे दिन सोमवार को उपस्थित श्रावकों को प्रवचन के दौरान […]

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lack of focus

ध्यान केंद्रित न होना – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Lack of focus – brahmacharya vigyan

  सेक्स से परहेज करना नपुंसकता का एक कारण बताया गया है। जब लोग परहेज रखकर सेक्स से दूरी बना लेते हैं तो उनमें अपराधबोध और एंजाइटी हो जाती है। कामेच्छा दबाने की यह प्रक्रिया जब बार-बार होती है तो समस्या की जड़ें फैल जाती हैं। दिमाग में एक भावनात्मक असंतुलन पैदा होता है और

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refraining from sex

सेक्स से परहेज करना – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Refraining from sex – brahmacharya vigyan

  कुछ लोग इस गलत धारणा में रहते हैं कि सेक्स से परहेज करना स्वास्थ्य व खुशी के लिए अच्छा है। वे अपनी तथाकथित ऊर्जा को सेक्स संबंधों से परहेज रखकर सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि सेक्स से दूर रहकर जिंदगी लंबी होती है, बदन हृष्टपुष्ट होता है और मानसिक

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scientific reasons for maintaining celibacy

ब्रह्मचर्य बनाए रखने के वैज्ञानिक कारण – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Scientific reasons for maintaining celibacy – brahmacharya vigyan

  ब्रह्मचर्य का शारीरिक, मानसिक व वाचिक वैसे तीनों प्रकार से पालन न होने पर पुरुष व स्त्री दोनों के शरीर में से सेक्स होर्मोन्स बाहर निकल जाते हैं | ये सेक्स होर्मोन्स ज्यादातर लेसीथीन, फोस्फरस, नाइट्रोजन व आयोडीन जैसे जरूरी तत्त्वों से बने हैं जो जीवन, शरीर और मस्तिष्क के लिए बहुत उपयोगी हैं|

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annaprashan sanskar

अन्नप्राशन संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Annaprashan Sanskar – brahmacharya vigyan

  जीवन में पहले पहल बालक को अन्न खिलाना इस संस्कार का उद्देश्य है। पारस्कर गृह्यसूत्र के अनुसार छठे माह में अन्नप्राशन संस्कार होना चाहिए। कमजोर पाचन शिशु का सातवे माह जन्म दिवस पर कराए। इसमें ईश्वर प्रार्थना उपासना पश्चात शिशु के प्राण-अपानादि श्वसन व्यवस्था तथा पंचेन्द्रिय परिशुद्धि भावना का उच्चारण करता घृतमय भात पकाना

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benefits of semen protection

वीर्यरक्षा से लाभ – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Benefits of semen protection – brahmacharya vigyan

  ► वीर्यरक्षा से कितने लाभ होते हैं वीर्यरक्षा से कितने लाभ होते हैं यह बताते हुए डॉ. मोलविल कीथ (एम.डी.) कहते हैं- “वीर्य तुम्हारी हड्डियों का सार, मस्तिष्क का भोजन, जोड़ों का तेल और श्वास का माधुर्य है। यदि तुम मनुष्य हो तो उसका एक बिन्दु भी नष्ट मत करो जब तक कि तुम

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evacuation ceremony

निष्क्रमण संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Evacuation ceremony – brahmacharya vigyan

  निष्क्रमण का अर्थ है बाहर निकलना। घर की अपेक्षा अधिक शुद्ध वातावरण में शिशु के भ्रमण की योजना का नाम निष्क्रमण संस्कार है। बच्चे के शरीर तथा मन के विकास के लिए उसे घर के चारदीवारी से बाहर ताजी शुद्ध हवा एवं सूर्यप्रकाश का सेवन कराना इस संस्कार का उद्देश्य है। गृह्यसूत्रों के अनुसार

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psychiatrist and sexual sciences

मनोचिकित्सक और यौन विज्ञान के ज्ञाता – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Psychiatrist and sexual sciences – brahmacharya vigyan

  आज कल के मनोचिकित्सक और यौन विज्ञान के ज्ञाता जो समाज को अनैतिकता, मुक्त साहचर्य (Free Sex) और अनियंत्रित विकारी सुख भोगने का उपदेश देते हैं उनको डॉ. निकोलस की बात अवश्य समझनी चाहिए। डॉ. निकोलस कहते हैं- “वीर्य को पानी की भाँति बहाने वाले आज कल के अविवेकी युवकों के शरीर को भयंकर

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naming ceremony

नामकरण संस्कार – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Naming ceremony – brahmacharya vigyan

  इस संस्कार का उदेश्य केवल शिशु को नाम भर देना नहीं है, अपितु उसे श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर उच्च से उच्चतर मानव निर्माण करना है। पश्चिमी सभ्यता में निरर्थक नाम रखने का अन्धानुकरण भारत में भी बढ़ता जा रहा है। उनके लिए चरक का सन्देश है कि नाम साभिप्राय होनें चाहिएं। नाम केवल सम्बोधन के

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psychology so real

मनोविज्ञान कितना यथार्थ – ब्रह्मचर्य विज्ञान | Psychology so real – brahmacharya vigyan

  पाश्चात्य मनोवैज्ञानिक डॉ. सिग्मंड फ्रायड स्वयं कई शारीरिक और मानसिक रोगों से ग्रस्त था। ‘कोकीन’ नाम की नशीली दवा का वो व्यसनी भी था। इस व्यसन के प्रभाव में आकर उसने जो कुछ लिख दिया उसे पाश्चात्य जगत ने स्वीकार कर लिया और इसके फलस्वरूप आज तक वे शारीरिक और मानसिक रोगियों की संख्या

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