वास्तु दोष निवारण शौचालय
वास्तु अनुसार शौचालय और स्नानघर एक साथ नहीं होना चाहिए। लेकिन बड़े शहरों में जगह की कमी के कारण स्नान घर और शौचालय साथ होते हैं जिससे वास्तु दोष बनता है। इस तरह के दोष को दूर करने के लिए शौचालय में शीशे की कटोरी में नमक भरकर रखना चाहिए और सप्ताह में इसे बदलते रहना चाहिए। घर में अगर उत्तर पूर्व दिशा की ओर शौचालय हो तो बाहरी दीवार पर उत्तर या पूर्व की ओर एक आइना लगाना चाहिए। अपने शौचालय की दक्षिणी दीवार पर पिरामिड लगाएं। यह वास्तु दोष को दूर करने में बहुत ही कारगर माना जाता है। यदि ईशान कोण (उत्तर दिशा) में शौचालय हो, तो वास्तु अनुसार उसके बाहर शिकार करते हुए शेर का चित्र लगाएं। 2 से 3 दिन में कम से कम एक बार पूरे बाथरूम को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। बाथरूम यदि एकदम साफ रहेगा तो इसका शुभ असर आपकी आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा। साफ-सफाई वाले घरों में देवी-देवताओं की विशेष कृपा बनी रहती है। नहाने के लिए बाथरूम बनाने का सबसे अच्छा स्थान उत्तर या पूर्व दिशा मानी जाती है। जरूरत पड़ने पर बाकी दिशाओं में भी बनाए जा सकते हैं। बाथरूम में पानी के नल व शावर को उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं। ये घर में नकरात्मक ऊर्जा को आने से रोकने में मदद करता है। स्नानघर में नीले रंग की बाल्टी और मग का ही प्रयोग करना चाहिए। शौचालय और स्नान घर का दरवाजा हमेशा बंद रखें साथ ही दरवाजे के ठीक सामने आइना नहीं लगाना चाहिए। किसी भी भवन में टॉयलेट ईशान कोण को छोड़कर कहीं भी बनाया जा सकता है। ईशान कोण में टॉइलट बनाने से स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां और आर्थिक कष्ट होने की संभावना रहती है। ”
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