what is a soul called after death?

मृत्यु के बाद आत्मा कहा जाती है ? – आत्मा का रहस्य | What is a soul called after death? – aatma ka rahasya

 

परिचय
दुनिया के हर इंसान के मन में कभी न कभी यह प्रश्र अवश्य उठता है कि आखिर जीवन और मृत्यु का रहस्य क्या है? जब भी मन में मृत्यु का ख्यालआता है या किसी शवयात्रा को गुजरते हुए देखते हैं तो रोमांचित हो जाते हैं।आखिर यह मृत्यु है क्या? क्या होता है मरने के बाद? मृत्यु के विषय में दुनियाभर में अलग-अलग तरह की बातें और मान्यताएं प्रचलित हैं।

इस तरह कि मान्यताओं और धारणाओं में से अधिकांश काल्पनिक,मनघढ़ंत एवं झूंटी होती हैं। किन्तु समय-समय पर इस दुनिया में कुछ ऐसे ररत्नों,तत्वज्ञानियों एवं योगियों ने जन्म लिया है जिन्होंने अपने जीवन काल में ही इस महत्वपूर्णगुत्थी को सुलझाया है। ऐसे आत्मज्ञानी महापुरुष समाधि के उच्च स्तर पर पहुंचकर समय के बंधन से मुक्त हो जाते हैं यानि कि कालातीत हो जाते हैं।इस कालातीत अवस्था में पहुंचकर वे यह आसानी से जान जाते हैं कि मृत्यु से पहले जीवन क्या था? और मृत्यु के बाद जीवन की गति क्या होती है। ऐसे ही पहुंचे हुए सिद्ध योगियों का स्पष्ट कहना है कि काल की तरह जीवन भी असीम ओर अनंत है। जीवन का न तो कभी प्रांरभ होता है और न ही कभी अंत। लोग जिसे मृत्यु कहते हैं वह मात्र उस शरीर का अंत है जो प्रकृति केपांच तत्वों (पृथ्वी,जल,वायु,अग्री और आकाश) से मिलकर बना था।

► आखिर मृत्यु के बाद आत्मा जाती कहां है?
ऐसा माना जाता है कि मानव शरीर नश्वर है, जिसने जन्म लिया है उसे एक ना एक दिन अपने प्राण त्यागने ही पड़ते हैं. भले ही मनुष्य या कोई अन्य जीवित प्राणी सौ वर्ष या उससे भी अधिक क्यों ना जी ले लेकिन अंत में उसे अपना शरीर छोड़कर वापस परमात्मा की शरण में जाना ही होता है.

यद्यपि इस सच से हम सभी भली-भांति परिचित हैं लेकिन मृत्यु के पश्चात जब शव को अंतिम विदाई दे दी जाती है तो ऐसे में आत्मा का क्या होता है यह बात अभी तक कोई नहीं समझ पाया है. एक बार अपने शरीर को त्यागने के बाद वापस उस शरीर में प्रदार्पित होना असंभव है इसीलिए मौत के बाद की दुनियां कैसी है यह अभी तक एक रहस्य ही बना हुआ है.

किस्से-कहानियों या फिर अफवाहों में तो मौत के पश्चात आत्मा को मिलने वाली यात्नाएं या फिर विशेष सुविधाओं के बारे में तो कई बार सुना जा चुका है लेकिन पुख्ता तौर पर अभी तक कोई यह नहीं जान पाया है कि क्या वास्तव में इस दुनियां के बाद भी एक ऐसी दुनियां है जहां आत्मा को संरक्षित कर रखा जाता है अगर नहीं तो जीवन का अंत हो जाने पर आत्मा कहां चली जाती है?

गीता के उपदेशों में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि आत्मा अमर है उसका अंत नहीं होता, वह सिर्फ शरीर रूपी वस्त्र बदलती है. वैसे तो कई बार आत्मा की अमर यात्रा के विषय में सुना जा चुका है लेकिन फिर यह सबसे अधिक रोमांच और जिज्ञासा से जुड़ा मसला है.

► शरीर त्यागने के बाद कहां जाती है आत्मा ?
गरूड़ पुराण जो मरने के पश्चात आत्मा के साथ होने वाले व्यवहार की व्याख्या करता है उसके अनुसार जब आत्मा शरीर छोड़ती है तो उसे दो यमदूत लेने आते हैं. मानव अपने जीवन में जो कर्म करता है यमदूत उसे उसके अनुसार अपने साथ ले जाते हैं. अगर मरने वाला सज्जन है, पुण्यात्मा है तो उसके प्राण निकलने में कोई पीड़ा नहीं होती है लेकिन अगर वो दुराचारी या पापी हो तो उसे पीड़ा सहनी पड़ती है. गरूड़ पुराण में यह उल्लेख भी मिलता है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमदूत केवल 24 घंटों के लिए ही ले जाते हैं और इन 24 घंटों के दौरान आत्मा को दिखाया जाता है कि उसने कितने पाप और कितने पुण्य किए हैं. इसके बाद आत्मा को फिर उसी घर में छोड़ दिया जाता है जहां उसने शरीर का त्याग किया था. इसके बाद 13 दिन के उत्तर कार्यों तक वह वहीं रहता है. 13 दिन बाद वह फिर यमलोक की यात्रा करता है.

पुराणों के अनुसार जब भी कोई मनुष्य मरता है और आत्मा शरीर को त्याग कर यात्रा प्रारंभ करती है तो इस दौरान उसे तीन प्रकार के मार्ग मिलते हैं. उस आत्मा को किस मार्ग पर चलाया जाएगा यह केवल उसके कर्मों पर निर्भर करता है. ये तीन मार्ग हैं अर्चि मार्ग, धूम मार्ग और उत्पत्ति-विनाश मार्ग. अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूममार्गपितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है

► अचानक नहीं आएगी मौत
जीवन का अंतिम अटल सत्य है मृत्यु। जिस व्यक्ति ने इस धरती पर जन्म लिया है उसे एक दिन अवश्य ही इस नश्वर शरीर देह को त्यागना पड़ता है। श्रीमदभागवत में श्रीकृष्ण ने भी यही संदेश दिया है कि आत्मा अमर है और यह देह नश्वर है। कभी-कभी कुछ लोगों को असमय ही मृत्यु का शिकार होना पड़ता है,असमय मृत्यु से बचने के लिए शिव पुराण में कई उपाय बताए गए हैं।

शिव पुराण के अनुसार असमय या अचानक होने वाली मृत्यु से बचने के लिए शनि आराधना सर्वश्रेष्ठ उपाय है। शनि देव असमय मृत्यु से बचाने में सक्षम हैं। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन है शनिवार। इस दिन भगवान शनि के निमित्त पूजन करने वाले व्यक्ति को असमय मृत्यु का भय नहीं रहता है। इसके साथ ही ज्योतिष संबंधी कुंडली के कई दोष भी इनकी आराधना से शांत हो जाते हैं।

सबसे क्रूर माने जाने वाले शनि से कृपा प्राप्त करने के लिए शनिवार के दिन विशेष पूजन करें। शनि के निमित्त शनि की वस्तुओं का दान करें। इसके अतिरिक्त भगवान शिव को जल में तिल डालकर अर्पित करें। शिवजी के साथ ही शनिदेव की आराधना से व्यक्ति अकाल मृत्यु से बच सकता है।

इस प्रकार प्रत्येक शनिवार को यह उपाय करने से अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है और व्यक्ति को लंबी आयु प्राप्त होती है। यह उपाय शिव पुराण में दिया गया है अत: इसमें शंका और संदेह न करें अन्यथा इस उपाय का उचित पुण्य प्राप्त नहीं हो सकेगा।

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