यदि कुंडली में सूर्य छठे, सातवें व दसवें भाव में स्थित हो अथवा गोचर में निर्बल व अशुभ अवस्था में हो तो यह कार्यक्षेत्र में समस्या, दुर्घटना में हड्डी टूटने, रक्तचाप की समस्या, नेत्र में कष्ट, उदर व अग्नि-तत्व से संबंधित रोग व शारिरिक पीड़ा का कारक माना गया है।
क्या उपाय करें : राजा, पिता व सरकारी पदाधिकारी का सम्मान करें। उदित सूर्य के समय में संभोग न करें। सूर्य से संबंधित कोई वस्तु मुफ्त में न लें। पीतल के बर्तनों का सर्वदा प्रयोग करें। रविवार के दिन दरिया की बहती जलधारा में गुड़ व तांबा प्रवाहित करें।