इस यंत्र को सिद्ध करने हेतु इसे सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण अथवा दीपावली की रात्रि में अनार की कलम तथा अष्टगंध से भोजपत्र पर ३४ बार लिखकर और धूप-दीप देकर किसी नदी में प्रवाहित करें। तत्पश्चात इस यंत्र को पुनः लिखकर विधिवत पूजन कर अपने पास रखें, हर प्रकार की प्रेत बाधा से रक्षा होगी।
इस यंत्र को सिद्ध करने की एक और विधि है। शनिवार को धोबी घाट पर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके इसे १०८ बार लिखकर तथा धूप-दीप दिखाकर बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें। फिर इसे भोजपत्र पर लिखकर प्रेत बाधा या नजर दोष से ग्रस्त व्यक्ति को गले में धारण कराएं, वह दोषमुक्त हो जाएगा।
नीचे अंकित यंत्र को प्रातः काल ५ से ८ बजे के बीच अनार की कलम तथा सफेद और लाल चंदन, केसर, कुंकुम,
कपूर, कस्तूरी, अगर तथा तगर की अष्टगंध से भोजपत्र पर लिखकर धूप, दीप आदि से उसकी पूजा करें और तदनंतर अपने घर के सामने कम से कम एक हाथ गहरे गड्ढे में गाड़ दें। ध्यान रखें, जिस स्थान पर यंत्र गाड़ें, वह कभी अपवित्र न हो। यह क्रिया निष्ठापूर्वक करें, घर की भूत-प्रेत, नजर दोष आदि से रक्षा होगी।
यदि यह संभव न हो, तो यंत्र को सिद्ध करके अपने घर के प्रवेश द्वार की चौखट के ऊपरी भाग में जड़ दें तथा उसकी नियमित रूप से धूपदीप देकर पूजा करते रहें। इस यंत्र के प्रभाव से कभी भी कोई प्रेत बाधा घर में प्रवेश नहीं कर सकेगी और न ही उस पर किसी नजर दोष का प्रभाव होगा।