वैदिक वास्तु शास्त्र

vaas‍tushaas‍tr aur ghar ka inteeri‍yar

वास्‍तुशास्‍त्र और घर का इंटीरि‍यर – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaas‍tushaas‍tr aur ghar ka inteeri‍yar – vedic vastu shastra

मकान की सजावट हमेशा वास्तु के हिसाब से करनी चाहिए! ऐसा करने वाला व्यक्ति या गृह स्वामी सदैव प्रसन्न, सुखी व निरोगी रहता है! यहाँ कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दिए जा रहे हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपने घर की सजावट कर सकते हैं – 1. मकान के ड्राइंग रूम में फर्नीचर जैसे सोफा, टेबल, […]

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vastu shastra kee vyaakhya

वास्तुशास्त्र की ब्याख्या – वैदिक वास्तु शास्त्र – vastu shastra kee vyaakhya – vedic vastu shastra

वास्तुशास्त्र भवन निर्माण की एक अदभुत कला है जिसमें सभी दोषों को दूर करके भवन निर्माण की सभी खूबियों का ध्यान रखते हुए निर्माण किया जाता है जिसमें रहने वाले के लिए सभी सुखों का अनुभव हो एवं आनंद की प्राप्ति होती हो तथा सम्पूर्ण विकास की प्राप्ति हो ऐसी कला को वास्तु शास्त्र कहते

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vaastushaastr batae kaise pati-patnee mein pyaar badhaen

वास्तुशास्त्र बताए कैसे पति-पत्नी में प्यार बढ़ाएं – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaastushaastr batae kaise pati-patnee mein pyaar badhaen – vedic vastu shastra

पति और पत्नी के बीच प्यार बना रहे इससे बढ़कर दांपत्य जीवन का और कोई सपना नहीं होता! आइए जानते हैं सरल वास्तु टिप्स जिन्हें अपना कर आपस में प्यार का धागा मजबूत किया जा सकता है- पति-पत्नी का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो! कमरा आयताकार हो तो दांपत्य जीवन में प्यार बना रहता है!

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vaastushaastr mukhy saiddhaantik baaten

वास्तुशास्त्र मुख्य सैद्धांतिक बातें – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaastushaastr mukhy saiddhaantik baaten – vedic vastu shastra

घर का मुख्य द्वार किसी अन्य के घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने न बनाएं ! घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगाएं और आंगन का कुछ भाग मिट्टी वाला भी रखें ! ईशान कोण किसी भी मकान का मुख कहलाता है ! अतः इस कोण को सदैव पवित्र रखना चाहिए ! रसोई

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vasudev ki visheshta

वास्तुदेव की विशेषताएँ – वैदिक वास्तु शास्त्र – vasudev ki visheshta – vedic vastu shastra

वास्तुदेव की तीन विशेषताएं होती हैं : – चर वास्तु : इसमें वास्तु पुरुष की नजर या रुख भाद्रपद ( अगस्त, सितम्बर ), आश्विन तथा कार्तिक ( अक्टूबर , नवम्बर ) महीनों के अवधि में दक्षिण की ओर होता है | तथा मार्गशीर्ष (नवम्बर-दिसंबर ), पौष ( दिसंबर – जनवरी ), और माघ (जनवरी-फरवरी )

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vaastu shaastr ke kuchh mahatvapoorn niyam

वास्तु शास्त्र के कुछ महत्वपूर्ण नियम – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaastu shaastr ke kuchh mahatvapoorn niyam – vedic vastu shastra

वास्तुशास्त्र मानव जाति के लिए एक बहुमूल्य उपहार है १ एक अच्छे वास्तुकार का कार्य आधुनिक सुख सुविधा से पूर्ण एक ऐसे भवन के निर्माण में अपना सहयोग देना है जो उसमें रहने वाले को सुख-समृधि दे सके, भवन की सरंचना में किसी तरह की क्षति पहुंचाए बिना भवन की सकारात्मक ऊर्जा को बढाकर इसमें

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vaastu shaastr dvaara grh klesh nivaaran

वास्तु शास्त्र द्वारा गृह क्लेश निवारण – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaastu shaastr dvaara grh klesh nivaaran – vedic vastu shastra

आज के आधुनिक युग में भवन निर्माण का कार्य अत्यन्त कठिन हो गया है! साधारण मनुष्य जैसे तैसे गठजोड़ करके अपने लिए भवन की निर्माण करता है! तब भी यदि भवन वास्तु के अनुसार न हो तो मनुष्य दुखी, चिंतित एवं परेशान रहने लगता है! वास्तु शास्त्र वस्तुतः कला भी हैं और विज्ञान भी !

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vaastu- kaise karen dishaon ka shodhan

वास्तु- कैसे करें दिशाओं का शोधन – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaastu- kaise karen dishaon ka shodhan – vedic vastu shastra

दिशाओं में देवी-देवताओं और स्वामी ग्रहों के आधिपत्य से संबंधित बहुत चर्चाएं की गई हैं! दिशाओं के देव व स्वामी होने से पृथ्वी पर किसी भूखंड पर निर्माण कार्य प्रारंभ करते समय यह विचार अवश्य कर लेना होगा कि भूखंड के किस भाग में किस उद्देश्य से गृह निर्माण कराया जा रहा है! यदि उस

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vastu kala kya hai

वास्तुकला क्या है, जानिए प्रकार – वैदिक वास्तु शास्त्र – vastu kala kya hai, jaane prakar – vedic vastu shastra

वास्तु कला दो प्रकार की होती है- उत्तर भारतीय वास्तुशास्त्र एवं दक्षिण भारतीय वास्तुशास्त्र! वर्तमान में दोनों का मिश्रण चल रहा है! भारतीय वास्तुशास्त्र का आधार देवता एवं पंच तत्व यथा आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी है! भारतीय वास्तुशास्त्रानुसार भूमि खरीदने से पहले भूमि परीक्षण, भूमि पूजन, नींव पूजन, भवन पूरा होने पर गृह प्रवेश-पूजन

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vaastu purush ke dosh

वास्तु पुरुष के दोष – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaastu purush ke dosh – vedic vastu shastra

यह एक कठिन विद्या है, जिसमें भौतिक निर्माण कृत्य में कब कौन देवता क्रोधित हो जाए व क्या परिणाम देंगे, इनका ज्ञान आवश्यक है! कुछ सामानय गृह दोष व उनके परिणाम बताए जा रहे हैं, जो जनोपयोगी हैं! सामान्य जन इनका बिना किसी विशेषज्ञ की मदद से भी उपयोग कर सकते हैं! देवतागण यदि रुष्ट

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