किसी जातक की कुंडली के गोचर में चंद्र निर्बल व पाप ग्रस्त हो तथा कुंडली में छठे, आठवें, दसवें व बारहवें भाव में स्थित हो तो इस कारण मानसिक पीड़ा, जल तत्व से जुड़ा रोग व पद व गुण हानि की समस्याएं आती हैं।
क्या उपाय करें : रात को दूध का सेवन न करें। जल व दूध को ग्रहण करते समय चांदी के पात्र का प्रयोग करें। सोमवार के दिन दरिया की बहती जलधारा में मिश्री व चावल को सफेद कपड़े में बांधकर प्रवाहित करें। सोमवार के दिन अपने दाहिने हाथ से चावल व चांदी का दान करें।