वास्तु शास्त्र

grah pravesh se pehle jaroori hai

गृह प्रवेश से पहले जरूरी है – वास्तुशास्त्र – grah pravesh se pehle jaroori hai – vastu shastra

क्या आप नए घर में प्रवेश करने जा रहे हैं? आप चाहते हैं कि नए घर में आपका जीवन खुशियों से भर जाए,हर परेशानी आपके जीवन को अलविदा कह जाए तो गृह प्रवेश से पहले नीचे लिखे सभी उपाय जरुर करें इससे आपका नया घर सकारात्मक उर्जा से भर जाएगा। – वास्तु शांति कराएं, विधिवत […]

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grahon kee jaanakaaree

ग्रहों की जानकारी – वास्तुशास्त्र – grahon kee jaanakaaree – vastu shastra

1.सूर्य-जन्म के समय सूर्य की स्थिति से जातक की देह, पिता, पराक्रम, धन, प्रसिध्दि व आसक्ति का विचार किया जाता है। यह पित्त प्रधान है। 2. चंद्र – यह वात व कफ प्रधान है। इसकी स्थिति से बुध्दि, मानसिक अवस्था, व्यावहारिक ज्ञान, माता, राय सुख व संचार सुख का विचार किया जाता है। 3. मंगल

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ghar banana kab prarambh karen?

घर बनाना कब प्रारंभ करें? – वास्तुशास्त्र – ghar banana kab prarambh karen? – vastu shastra

वास्तु शास्त्र में प्राचीन मनीषियों ने सूर्य के विविध राशियों पर भ्रमण के आधार पर उस माह में घर निर्माण प्रारंभ करने के फलों की ‍विवेचना की है। 1. मेष राशि में सूर्य होने पर घर बनाना प्रारंभ करना अति लाभदायक होता है। 2. वृषभ र‍ाशि में सूर्य : संपत्ति बढ़ना, आर्थिक लाभ 3. मिथुन

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darvaje ki sankhya : vastu ke siddhant

दरवाजों की संख्या : वास्तु के सिद्धांत – वास्तुशास्त्र – darvaje ki sankhya : vastu ke siddhant – vastu shastra

वास्तु के सिद्धांतों का परिपालन करते हुए बनाया गया मकान, उसमें निवास करने वालों के जीवन की खुशहाली, उन्नति एवं समृद्धि का पतीक होता है। मकान में दरवाजे अहम भूमिका निभाते हैं। साधारणतया आम इंसान मकान में दरवाजों की संख्या के बारे में भ्रमित रहता है। क्योंकि वास्तु विषय की लगभग सभी पुस्तकों में दरवाजों

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disha ka swami grah

दिशा का स्वामी ग्रह – वास्तुशास्त्र – disha ka swami grah – vastu shastra

पूर्व दिशा का स्वामी सूर्य इस दिशा में भवन शास्त्र के अनुसार उचित प्रकार से बना हो, इस दिशा का विकिरण घर में आता हो, कोई दोष नहीं हो तो उस घर में निवास करने वाले व्यक्तियों को उत्तम स्वास्थ्य, धन-धान्य की प्राप्ति होती है। निर्माण दोषपूर्ण होने पर व्यक्ति इनसे वंचित रहता है। रोगी

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vastu dosh nivaran yantra.

वास्तुदोष निवारक यन्त्र – वास्तुदोष निवारण – vastu dosh nivaran yantra – vastu dosh nivaran

वास्तु दोषों के विभिन्न दिशाओं में होने से उससे सम्बन्धित यन्त्र उपयोग में लाकर उन दोषों का निवारण किया जा सकता है। इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि यन्त्र जानकर व्यक्ति द्वारा विधि पूर्वक बनाये गये हों व उनकी शुद्धि भी कर ली गई हो।यन्त्र का उपयोग किसी भी जानकर वास्तुशास्त्री से सलाह

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vastu shastra mein kyon hai darpan ka mahatva

वास्तुशास्त्र में क्यों है दर्पण का महत्व – वास्तुदोष निवारण – vastu shastra mein kyon hai darpan ka mahatva – vastu dosh nivaran

वास्तुशास्त्र में दर्पण को उत्प्रेरक बताया गया है, जिसके द्वारा भवन में तरंगित ऊर्जा की सृष्टि सुखद अहसास कराती है। इसके उचित उपयोग द्वारा हम अनेक लाभजनक उपलब्धियां अर्जित कर सकते हैं। कैसे, आइए जानें- भवन में छोटी और संकुचित जगह पर दर्पण रखना चमत्कारी प्रभाव पैदा करता है। * दर्पण कहीं भी लगा हो,

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saphalata chaahate hain to apanaen ye vaastu totake

सफलता चाहते हैं तो अपनाएं ये वास्तु टोटके – वास्तुदोष निवारण – saphalata chaahate hain to apanaen ye vaastu totake – vastu dosh nivaran

हर व्यक्ति रोज अपना सबसे ज्यादा समय अपने कार्यस्थल पर बिताता है। यदि कार्यस्थल यानी ऑफिस या व्यवसायिक स्थल का वास्तु ठीक हो तो व्यक्ति को काम करने के लिए सकारात्मक उर्जा मिलती है। यदि कार्यस्थल का वास्तु सही हो तो वहां काम करने वाला व्यक्ति दोगुनी उर्जा से काम करने लगता है। वास्तु नियम

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sehat aur bhaagy ke lie ghar mein laen buddha

सेहत और भाग्य के लिए घर में लाएं बुद्धा – वास्तुदोष निवारण – sehat aur bhaagy ke lie ghar mein laen buddha – vastu dosh nivaran

फेंगशुई के अनुसार बुद्धा की मुर्ति आज के इस युग में सुख का पर्याय मानी गई है। इस मुर्ति को अधिकतर घर में मुख्यद्वार के सामने लॉबी या बैठक कक्ष में रखी जा सकती है।– मूर्ति का मुंह हमेशा मुख्यद्वार के सामने होना चाहिए और कुछ ऊंचाई वाले स्थान पर ऐसे स्थापित करें कि यह

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kaun sa samay kis kaam ke liye hota hai shubh?

कौन सा समय किस काम के लिए होता है शुभ? – वास्तुशास्त्र – kaun sa samay kis kaam ke liye hota hai shubh? – vastu shastra

सूर्य, वास्तु शास्त्र को प्रभावित करता है इसलिए जरूरी है कि सूर्य के अनुसार ही हम भवन निर्माण करें तथा अपनी दिनचर्या भी सूर्य के अनुसार ही निर्धारित करें। 1- सूर्योदय से पहले रात्रि 3 से सुबह 6 बजे का समय ब्रह्म मुहूर्त होता है। इस समय सूर्य घर के उत्तर-पूर्वी भाग में होता है।

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