ghar mein seedhiyaan kaisee hon?

घर में सीढिय़ां कैसी हों? – वास्तु शास्त्र के अनुसार घर – ghar mein seedhiyaan kaisee hon? – vastu shastra ke anusar ghar

यदि मकान बहुमंजिला है तो उसमें सीढिय़ा अवश्य होती है। वर्तमान समय में डिजाइनर सीढिय़ों (लोहे की या घुमावदार) का चलन भी है। सीढिय़ां भी घर के वास्तु को प्रभावित करती हैं।
मकान में सीढिय़ां बनवाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें—–

1- वास्तु सम्मत सीढिय़ां भवन के पूर्व या दक्षिण दिशा में बनवाई जानी चाहिए।
2- सीढिय़ों का उतार-चढ़ाव ढलान के अनुसार ही होना चाहिए। यानि सीढिय़ों पर पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की तरफ चढ़ाई हो सकती है।
3- यदि सीढिय़ां बीच में घुमावदार हों तो यह घुमाव चढ़ते समय क्लॉकवाइज यानि बाएं से दाएं होनी चाहिए। चूंकि पृथ्वी भी इसी दिशा में घूमती है और चढ़ते समय एनर्जी भी अधिक खर्च होती है इसलिए क्लॉकवाइज घूमते हुए ही चढऩा चाहिए ताकि अतिरिक्त ऊर्जा न लगानी पड़े।
4- चूंकि उतरते समय कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए एण्टी-क्लॉकवाइज घूमते हुए भी उतरा जा सकता है। बड़े भवनों में नीचे से दो तरफ से सीढिय़ां चढ़ाई जाती हैं और घुमाव के स्थान पर मिलाते हुए ऊपर ही कर दी जाती है अथवा नीचे से एक सीढ़ी चढ़ाते हुए घुमाव के स्थान पर उस दो स्थानों पर उसे दो भागों में दो तरफ चढ़ा दी जाती है, इससे चढ़ते व उतरते समय क्लॉक वाइज घूमा जा सकता है।
5- यदि सीढिय़ां बिल्कुल सीधी हैं, बीच में कोई घुमाव नहीं है तब भी छत पर प्रवेश करते समय घड़ी की सूइयों की दिशा में ही दरवाजा होना चाहिए ताकि छत के कमरे में प्रवेश करते समय क्लॉकवाइज घूमना पड़े। एण्टी-क्लॉकवाइज घुमाव वाला दरवाजा न रखें। यदि सीढिय़ां सीधे ही छत के कमरे में प्रवेश करती हों तब किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है।
6- भवन के मध्य भाग में कोई पिलर अथवा सीढिय़ां नहीं बनवाई जानी चाहिए।

घर में सीढिय़ां कैसी हों? – ghar mein seedhiyaan kaisee hon? – वास्तु शास्त्र के अनुसार घर – vastu shastra ke anusar ghar

 

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