shauchaalay kee disha va aapaka svaasthy

शौचालय की दिशा व आपका स्वास्थ्य – स्वास्थ्य का वास्तु – shauchaalay kee disha va aapaka svaasthy – swasthya ka vastu

वास्तुअनुसार घर में बना टॉयलेट और आपका स्वास्थ्य
आजकल घरों में जगह का अभाव होने के कारण बाथरूम और टॉयलेट एक साथ होना बहुत सामान्य बात है। वास्तुशास्त्र अनुसार ऐसा होना सही नहीं है। वास्तु अनुसार यदि घर का शौचालय उचित स्थान पर ना हो तो ये आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. वास्तु अनुसार टॉयलेट का पूर्व, उत्तर-पूर्व, या उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में होना स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का एक कारण हो सकता है. घर की उत्तर-पूर्व दिशा में में डस्टबिन, टॉयलेट, गोदाम नहीं होने चाहिए। किसी भी भवन में टॉयलेट ईशान कोण को छोड़कर कहीं भी बनाया जा सकता है। ईशान कोण में टॉइलट बनाने से स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां और आर्थिक कष्ट होने की संभावना रहती है। 2-3 दिन में कम से कम एक बार पूरा बाथरूम अच्छी तरह साफ करना चाहिए। बाथरूम यदि एकदम साफ रहेगा तो इसका शुभ असर आपके स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा। यदि बाथरूम का दरवाजा बेडरूम में खुलता हो तो उसे हमेशा बंद रखना चाहिए। बाथरूम के दरवाजे पर पर्दा लगा सकते हैं। बेडरूम और बाथरूम की ऊर्जा का परस्पर आदान-प्रदान हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता। वास्तु के अनुसार, दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर बनाया गया शौचालय काफी लाभकारी है। इस दिशा बना शौचालय व्यक्ति की चिंता को कम करता है। दक्षिण-पूर्व जोन में शौचालय आत्मविश्वास, शारीरिक मजबूती में कमी का कारण बनता है। उत्तर-पूर्व दिशा में बना शौचालय रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देता है। इस दिशा में बने शौचालय का प्रयोग करने वाले लोग मौसमी बीमारियों की वजह से लगातार बीमार पड़ते हैं। घर के पूर्व, उत्तर-पूर्व जोन में बना शौचालय व्यक्ति को थकान और भारीपन महसूस कराता है। व्यक्ति को कब्ज की शिकायत रहती है. घर के उत्तर-पूर्व दिशा में भारी निर्माण या फिर शौचालय बनाने से अनिद्रा, मानसिक रोग, तनाव, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं होने लगती है. ”

शौचालय की दिशा व आपका स्वास्थ्य – shauchaalay kee disha va aapaka svaasthy – स्वास्थ्य का वास्तु – swasthya ka vastu

 

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